Monday, October 2, 2017

जिंदगी तो जैसे चुटकी में बीत गई.....


जिंदगी तो जैसे चुटकी में बीत गई.....
अभी तो मां की रानी बिटिया बनी थी
पर तूने कहा की बिटिया अब सयानी हो गई
पापा ने कहा अब तुम्हें अपनी दुनिया बसानी है
पर अभी तो मैनें आपकी उंगली थामी थी।।।

जिंदगी तो जैसे चुटकी में बीत गई.....
अभी तो दुनिया को जानना शुरू किया था
पर दुनिया क्यों अब सिमट सी रही है
पापा ने कहा साथ यहां तक का था
पर मुझे तो अभी भी अंधेरे से डर लगता है।।।

जिंदगी तो जैसे चुटकी में बीत गई.....
मां दुर्गा और काली जैसा बनना सिखाया मुझे
पर अब अपनों से लड़ने में डर लगता है
दुनिया जीतना सिखाया था मुझे
पर अब कुछ पाने से भी डर लगता है।।।

जिंदगी तो जैसे चुटकी में बीत गई.....
आज जिंदगी थमी सी लगती है
क्योंकि अब भी आंखों में नमी सी रहती है
सब कहते है कि आंखें तेरी बेकार ही नम है
पर सवाल तो मुझे भी रहता है कि आखिर दिल तू क्यूं रोता है।।।

जिंदगी तो जैसे चुटकी में बीत गई.....
आज भी दिल आहिस्ता चलने को कहता है
आज भी दिल बदलने को कहता है
अभी कुछ कर्ज चुकाने बाकि है
अभी कुछ और फर्ज़ निभाने बाकि है।।।