घुटनों से रेंगते रेंगते
जब उंगली थाम मां ने चलना सिखाया
वो अहसास याद आता है
सुबह सवेरे जब मुझे उठाती
घर से निकलते ही काला टीका वो मुझे लगाती
उसका वो स्पर्श मुझे याद आता है
स्कूल से थककर जब मैं घर लौटती
मेरी गलती पर मुझे समझाती
वो डांट मुझे याद आती है
परीक्षा पर जाने से पहले दही खिलाना
कॉलेज की कहानियां सुनने बैठी
वो दोस्त जैसी मां मुझे याद आती है
ऑफिस के लिए भरे खाने के डिब्बे
देर रात खाने की प्लेट लेकर इंतजार करना
वो हाथों का स्वाद मुझे याद आता है
एक वक्त ऐसा आया जब मां को मैने समझाया
उसके आंचल में छिपकर दुनिया से लड़ना चाहा
और उसने अपना हाथ मेरे सिर से उठाया
मुझे अपना कहने से उसने ठुकराया
पर
फिर भी मां मुझे तेरा स्नेह, प्यार, दुलार और फटकार याद आती है
जब उंगली थाम मां ने चलना सिखाया
वो अहसास याद आता है
सुबह सवेरे जब मुझे उठाती
घर से निकलते ही काला टीका वो मुझे लगाती
उसका वो स्पर्श मुझे याद आता है
स्कूल से थककर जब मैं घर लौटती
मेरी गलती पर मुझे समझाती
वो डांट मुझे याद आती है
परीक्षा पर जाने से पहले दही खिलाना
कॉलेज की कहानियां सुनने बैठी
वो दोस्त जैसी मां मुझे याद आती है
ऑफिस के लिए भरे खाने के डिब्बे
देर रात खाने की प्लेट लेकर इंतजार करना
वो हाथों का स्वाद मुझे याद आता है
एक वक्त ऐसा आया जब मां को मैने समझाया
उसके आंचल में छिपकर दुनिया से लड़ना चाहा
और उसने अपना हाथ मेरे सिर से उठाया
मुझे अपना कहने से उसने ठुकराया
पर
फिर भी मां मुझे तेरा स्नेह, प्यार, दुलार और फटकार याद आती है