कयों कुछ सपने दिखाती
है जिंदगी,
किसी
पल
हसाँती
और
किसी
पल रूलाती है जिंदगी,
एक हसीन खवाब दिखाती है
दूजे पल खवाब उडा ले जाती है जिंदगी,
कुछ पाने की आस जगाती हे
फिर सब लूटा ले जाती हे जिंदगी,
किसी को पाने की खुशी देती हे जिदंगी
न जाने कयों किसी को दूर ले जाती हे जिदंगी,
सीखा हे बचपन से जिदंगी को सुधारना
नहीं सीखा हे तो बस इसे समझ पाना,
कुछ तो जीत बैठे हे जिदंगी को
पर हम तो आज भी समझना चाहते हे
जिदंगी को !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!
No comments:
Post a Comment