Friday, January 13, 2017

देखो, सोचो, पूछो, समझो



देखो, सोचो, पूछो, समझो और फिर आवाज़ उठाओ
पर देखों शांति भंग होने न पाए।

देश बदलने का एक जो दौर चल पड़ा है
कही उस रंग में भंग पड़ने न पाए।

मकसद बड़ा हो तो मुश्किल भी बड़ी आती है
मुश्किल आने से कही मकसद बदल न पाए।

जहां राष्ट्रीय गान पर खड़े होने का फरमान दिया जाए
देखो कहीं फरमान की आड़ में देश-भक्ति कम न हो पाए।

जब फ्री में बंटने लगे सीम सड़को पर
पर देखना की दिलों से दिलों तक की दूरी कम हो न पाए।

नोटबंदी के दौर में जब कैशलेस हो गए भगवान के घर
तब देखना की Paytm करने से कहीं भक्ती कम न हो पाए।

सरकार जब साइकिल छोड़ सिंहासन के लिए खड़ी हो जाए
देखना की कही गद्दी पाने की चाह परिवार कलह को सड़को पर न ला पाए।  

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